सबसे कठिन काम है सबको खुश रखना,सबसे आसान काम है सबसे खुश रहना
आपका आज का दिन मंगलमय हो
दिनाँक:-13/03/2023, सोमवार * षष्ठी, कृष्ण पक्ष,चैत्र(समाप्ति काल)
| तिथि |
षष्ठी 21:26:55 तक |
| पक्ष |
कृष्ण |
| नक्षत्र |
विशाखा 08:20:16 |
| योग |
हर्शण 17:08:38 |
| करण |
गर 09:47:44 |
| करण |
वणिज 21:26:55 |
| वार |
सोमवार |
| माह |
चैत्र |
| चन्द्र राशि |
तुला 26:17:39 |
| चन्द्र राशि |
वृश्चिक |
| सूर्य राशि |
कुम्भ |
| रितु |
वसंत |
| आयन |
उत्तरायण |
| संवत्सर |
नल |
| विक्रम संवत |
2079 |
| शक संवत |
1944 |
| सूर्योदय |
06:32:42 |
| सूर्यास्त |
18:25:07 |
| दिन काल |
11:52:25 |
| रात्री काल |
12:06:28 |
| चंद्रोदय |
24:04:04 |
| चंद्रास्त |
09:51:09 |
लग्न—–कुम्भ 28°0′ , 328°0′
| सूर्य नक्षत्र |
पूर्वभाद्रपदा |
| चन्द्र नक्षत्र |
विशाखा |
| नक्षत्र पाया |
रजत |
🚩💮🚩 पद, चरण 🚩💮🚩
| तो |
विशाखा 08:20:16 |
| ना |
अनुराधा 14:21:02 |
| नी |
अनुराधा 20:19:54 |
| नू |
अनुराधा 26:16:51 |
💮🚩💮 ग्रह गोचर 💮🚩💮
| सूर्य |
कुम्भ 28 : 29 पू o भा o , 3 दा |
| चन्द्र |
वृश्चिक 02°:23, विशाखा , 4 तो |
| बुध |
कुम्भ 23°: 34′ पूoभाo’ 2 सो |
| शुक्र |
मीन 00 °05, अश्विनी ‘ 1 चू |
| मंगल |
मिथुन 00°30 ‘ मृगशिरा’ 3 का |
| गुरु |
मीन 20°30 ‘ रेवती , 2 दो |
| शनि |
कुम्भ 6°53 ‘ धनिष्ठा ‘ 4 गे |
| राहू |
(व) मेष 12°20 अश्विनी , 4 ला |
| केतु |
(व) तुला 12°20 स्वाति , 2 रे |
🚩💮 शुभा$शुभ मुहूर्त 💮🚩
| राहू काल |
08:02 – 09:31 अशुभ |
| यम घंटा |
10:59 – 12:29 अशुभ |
| गुली काल |
13:58 – 15: 27अशुभ |
| अभिजित |
12:05 – 12:53 शुभ |
| दूर मुहूर्त |
12:53 – 13:40 अशुभ |
| वर्ज्यम |
12:21 – 13:57 अशुभ |
💮चोघडिया, दिन
| अमृत |
06:33 – 08:02 शुभ |
| काल |
08:02 – 09:31 अशुभ |
| शुभ |
09:31 – 10:59 शुभ |
| रोग |
10:59 – 12:29 अशुभ |
| उद्वेग |
12:29 – 13:58 अशुभ |
| चर |
13:58 – 15:27 शुभ |
| लाभ |
15:27 – 16:56 शुभ |
| अमृत |
16:56 – 18:25 शुभ |
🚩चोघडिया, रात
| चर |
18:25 – 19:56 शुभ |
| रोग |
19:56 – 21:27 अशुभ |
| काल |
21:27 – 22:58 अशुभ |
| लाभ |
22:58 – 24:28* शुभ |
| उद्वेग |
24:28 – 25:59 अशुभ |
| शुभ |
25:59 – 27:30 शुभ |
| अमृत |
27:30 – 29:01 शुभ |
| चर |
29:01 – 30:32 शुभ |
🚩होरा, दिन
| चन्द्र |
06:33 – 07:32 |
| शनि |
07:32 – 08:31 |
| बृहस्पति |
08:31 – 09:31 |
| मंगल |
09:31 – 10:30 |
सूर्य |
10:30 – 11:30 |
| शुक्र |
11:30 – 12:29 |
| बुध |
12:29 – 13:28 |
| चन्द्र |
13:28 – 14:28 |
| शनि |
14:28 – 15:27 |
| बृहस्पति |
15:27 – 16:26 |
| मंगल |
16:26 – 17:26 |
| सूर्य |
17:26 – 18:25 |
🚩होरा, रात
| शुक्र |
18:25 – 19:26 |
| बुध |
19:26 – 20:26 |
| चन्द्र |
20:26 – 21:27 |
| शनि |
21:27 – 22:27 |
| बृहस्पति |
22:27 – 23:28 |
| मंगल |
23:28 – 24:28 |
| सूर्य |
24:28* – 25:29 |
| शुक्र |
25:29* – 26:29 |
| बुध |
26:29* – 27:30 |
| चन्द्र |
27:30* – 28:31 |
| शनि |
28:31* – 29:31 |
| बृहस्पति |
29:31* – 30:32 |
🚩विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार (लगभग-वास्तविक समय के समीप)
| दिल्ली |
+10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट |
| जयपुर |
+5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट |
| कोटा |
+5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट |
| लखनऊ |
+25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट |
| कोलकाता |
+54—–जैसलमेर -15 मिनट |
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
💮दिशा शूल ज्ञान———–पश्चिम
परिहार-:आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा गुड़ खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll
🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।
15 + 6 + 2 + 1 = 24 ÷ 4 = 0 शेष
स्वर्ग लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l
🚩💮 ग्रह मुख आहुति ज्ञान 💮🚩
सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
गुरु ग्रह मुखहुति
उपरान्त गुरु
💮 शिव वास एवं फल -:
21+ 21 + 5 = 47 ÷ 7 = 1 शेष
कैलाश वास = शुभ कारक
🚩भद्रा वास एवं फल -:
स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।
रात्रि 21 :27 से प्रारम्भ
स्वर्ग लोक = शुभ कारक
विशेष जानकारी
सर्वार्थ सिद्धि योग 08:20
एकनाथ षष्ठी
वनचंद्र जयंती